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प्रेत



ये मै नहीं
मरी हुई हसरतों का
कोई प्रेत है मुझ में,
जो जलाये रखता है
अतीत की धूनी
अवचेतन में,
तुझे भूलने की प्रक्रिया में
बंद हो जाते है सभी द्वार
चेतना के,
तभी एक झरोखा सा
खोल देता है ये प्रेत
हो कर जिसमे से तेरी यादें
समा जाती है जेहन में,
और इस तरह एक बार फिर
जाया हो जाता है प्रयास
तुझे भूल जाने का.....

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