हास-
अति दुःख से
उपजा था हास,
उर में लत बन
जा बैठा,
अब ,जब जब मै हँसता हूँ
सब कहते हैं "चुप हो जा..,
-दहेज़-
चार भैन म्हारी घरवाली
सासू खूब हँसे है,
ससुरा रोवे, कैवे "चुप री"
अब भी तीन बची सै..,
-आदम-
ठोकर खा कर गिरा कोई
आदम सब हंसने लगे,
एक मगर कोई ऐसा था
जो तब भी खामोश था,
सबने सोचा पागल है
पर ये हास्य-बोध का दोष था..





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