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गुज़ारिश

सुरमई सबेरे की तरह
मीठी धूप की तरह
स्वप्न-निद्रा की तरह
उड़ते हंसो की कतारों की तरह,
          तुम्हारे चेहरे की भंगिमाओ का
                               बनना-बिगड़ना
          मेरी हर बात पर लड़ना-झगड़ना,  
प्रेम करना, मुस्कुराना,
मुश्किलों में भी न घबराना,
          हर छोटी लकीर तुम बड़ी कर देती थी..,
तुम्हारे अधरों की लकीर
तुम्हारे निगाहों की लकीर
तुम्हारी बाँहों  की लकीर
तुम्हारे गीतों के गूंजते सुरों की लकीर,
                   तुम सब खुबसूरत कर देती थी..,
मुझे याद है तुम मुझे
नई नई परिभाषाएं बताती
सुंदर-असुंदर,आकृति-विकृति,
            फिर हमारे बीच एक लम्बी लकीर खिंच गई..
            जिसे इस बार तुमने और लम्बा कर दिया...
मुझे याद है तुम्हारा सिखाना
 सिखाने का बेहतरीन हुनर ....,
            तो अब तुम कहा हो?
             जब मै विकृत हो चुका हूँ!
किसी की यादो में गुम हो?
या कोई और तुम्हे याद करता है?
या अब तुमने चेहरा बदल लिया है?
या अकेली हो और मुझे और पिछली
चौदह-१०जनवरी सोचा करती हो?
            " मै किसी भी भुलावे में नहीं""
          मै जानता हूँ तुम सब" भूल चुकी हो.,
                        ' बस"
            एक अंतिम गुज़ारिश है,
                    ना" मत कहना..,
          मुझे भी सिखा दो ना -" सब भूल जाना "

1 comments:

animesh

A day will come when you'll look for me.
A day will come when you'll miss me.
A day will come when you'll again love me.
But on that day... I won't love you anymore...

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