1

अभिमानिनी

एक बार छला उसने मुझे
तब से अब तक छला ही जा रहा हूँ ,
शायद उसकी नीयत ऐसी नहीं
पर मेरी नियति ऐसी ही है,
किन्तु अब मै कटिबद्ध हूँ
उसे चाहने क लिए नहीं,
उसे खुद को न चाहने देने क लिए
उसके लिए या फिर वो किसी
मायाविनी की तरह अलोप हो जाए,
या स्वयं-सिद्धा का रूप धरे, सामने आ खड़ी हो,
या किसी अभिमानिनी की तरह
बार-बार मेरे ख्वाबों में आ कर
वो ये साबित करे की,
मै अब भी तुम्हारे दिमाग में हूँ,
लेकिन उसे ये जान लेना जरुरी है की
अब वो सिर्फ यदा-कदा नींदों में है,
मेरे जागने पर अब वो नहीं होती,
मै अपनी संकल्प-हीनता जानता हूँ
सो अब मैंने सोना छोड़ दिया है,
सारी रात जागी आँखों से सोचता रहता हूँ की,
अब मै कटिबद्ध हूँ, उसे चाहने के लिए नहीं,
उसे खुद को अब और न चाहने देने के लिए,
किन्तु अभिमानिनी ये तुम भी जानती हो की
              मै अपनी संकल्प-हीनता जानता हूँ...,

1 comments:

animesh

Whatever you do, whatever you wish, wherever you go, you'll never find me once again.
A moment may come, you may feel we're together, but it's just a dream, it'll also pass on...

Just like that...

Post a Comment

Siguiente Anterior Inicio