यम ने नचिकेता को"मृत्यु' का क्या रहस्य बताया,
ये तो अरस्तु ने, न निराला ने समझाया
सुकरात को विष पिलाया गया
मसीह को सूली पर लटकाया गया,
गुजरी बातों में उलझना नहीं चाहता मैं
इन्हें दोहराना भी नहीं चाहता,,
पर मृत्यु-शैया पर लेटा रुग्ण धनकुबेर भी मरता नहीं
दो टुकड़ों में कट चुके इन्सान से भी तुम्हारा मिलन होता नहीं,
जब तक की'मृत्यु" तुम न चाहो
लोग दर्द से रो कर भी,
जर्जर हो कर भी,
तुम्हे क्यूँ नहीं पाते,जब तक कि तुम न चाहो?
तुम्हारा वरण तुम्हारी इजाज़त से ही होता है,
'मौत" क्यूँ नहीं आने देती तुम उन्हें अपने पास
जो पीड़ा में कुछ भी कर के तुम्हे पाना चाहते हैं?
यम या तुम इच्छा-मृत्यु क्यूँ लागू नहीं करते?
मुझे तो इसका कुछ अलग ही राज़ समझ आता है,
'मौत"तुम निस्संदेह जीवन से भी खुबसूरत हो,
तुमसे वही मिलता है जिसे तुम चाहो
'मौत "तुम निस्संदेह जीवन से भी खुबसूरत हो,
मैंने दर्द में तुम्हे काफी तलाशा
जतन बाद भी तुम नहीं मिली,
लेकिन ये मेरा वादा है तुमसे की
मै कितना भी जर्जर,रुग्ण, हो जाऊंगा
तुम्हें सोचूंगा भी नहीं,
क्यूंकि 'मृत्यु" एक दिन मुझे तलाशती ,
मेरे वरण हेतु तुम स्वयम आओगी,
और तब मै तुम्हारे साथ तुरत चल पडूंगा,
क्यूंकि
'मौत" तुम निस्संदेह जीवन से भी खुबसूरत हो.
'मौत" निस्संदेह तुम जीवन से भी ज्यादा खुबसूरत हो ,,






4 comments:
सही अर्थों में मृत्यु महबूबा से अधिक वफादार तो है ही. एक बार जिसका वरण किया उसे ठुकराती तो नहीं.
http://www.animeshkmishra.blogspot.com/
"maut"hamesha sath sath chalne wali saathi kafi khubsurat hai ye aapki lekhni ne saabit kar diya.....par isne 'varan' kar liya to iski varnana kaise hogi
nayi kriti k intzar me.......
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